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महिलाएं करेंगी खेतों में ड्रोन से नैनो यूरिया का छिड़काव

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महिलाएं करेंगी खेतों में ड्रोन से नैनो यूरिया का छिड़काव
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव सुधीर राजपाल के साथ कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आज करनाल के शामगढ़ गांव में ड्रोन से नैनो यूरिया के छिड़काव का प्रदर्शन देखा. ड्रोन से नैनो यूरिया के स्प्रे के दौरान उन्होंने इसकी तकनीकियों को बारीकी से देखा और किसानों से इस नवीनतम तकनीक को अपनाने की बात कही. मीडिया से बातचीत में सुधीर राजपाल ने कहा कि ड्रोन से खाद और दवाई के स्प्रे की तकनीक से न केवल किसान बल्कि समाज को भी बहुत फायदा होगा. सरकार की ओर से बड़े स्तर पर खेतों में ड्रोन से स्प्रे का प्रदर्शन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि करनाल में 6 हजार एकड़ में ड्रोन से यूरिया का स्प्रे किया जा चुका है. सुधीर राजपाल ने कहा कि किसानों ने बताया है कि इससे उन्हें काफी फायदा हुआ है. इससे न केवल फसल में समान रूप से यूरिया का स्प्रे होता है बल्कि पानी और यूरिया की भी बचत होती है. उन्होंने कहा कि पुरानी विधि से दवाई पानी के साथ जमीन में जाकर भूमिगत जल में मिल जाती है जिससे भूमिगत जल दूषित हो जाता है, जिसका स्वास्थ्य पर भी बुरा असर होता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी नैनो यूरिया के ड्रोन से छिड़काव पर जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ड्रोन की ट्रेनिंग देने के लिए दृश्या कंपनी, कृषि विभाग के साथ इफको की तरफ से भी ड्रोन दीदी के नाम से ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. कृषि विभाग के प्रधान सचिव ने कहा कि इससे महिलाएं स्वावलंबी होगी और उन्हें रोजगार के अवसर मिलेंगे. ड्रोन प्रशिक्षण पर महिलाओं ने कही ये बात एक सवाल के जवाब में सुधीर राजपाल ने कहा कि ड्रोन खरीदने के लिए किसानों को सब्सिडी देने पर विभाग विचार करेंगे और किसी योजना के तहत इसका प्रावधान किया जाएगा. वहीं ड्रोन का प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं ने कहा कि उन्होंने ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग ली है और अब वह ड्रोन से खेतों में नैनो यूरिया का छिड़काव करेंगी. यह किसानों के लिए एक अच्छी पहल है. ड्रोन विशेषज्ञ डॉ सत्येंद्र यादव ने कहा कि हम प्रदेश भर में जाकर किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो यूरिया के छिड़काव का प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह तकनीक किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है. किसानों की आशंकाओं और समस्याओं को दूर करने के लिए उनके खेतों में जाकर ड्रोन से नैनो यूरिया का प्रदर्शन किया जाता है और किसानों को यह तकनीक पसंद भी आ रही है.