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बस एक पुरानी साड़ी और धोती करेगी नीलगाय के आतंक का खात्मा, देखिये देसी जुगाड़

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बस एक पुरानी साड़ी और धोती करेगी नीलगाय के आतंक का खात्मा, देखिये देसी जुगाड़
किसानों के लिए उनकी फसल ही सब कुछ होती है. उसकी देखभाल के लिए वह हर उपाय को अपनाते हैं, लेकिन देश के कई राज्यों में किसान नीलगाय और जंगली मवेशियों से काफी परेशान हो गए हैं. किसानों की अक्सर शिकायत रहती है कि उनकी फसलें नीलगाय और जंगली जानवर खराब कर देते हैं. ऐसे में किसान नीलगाय और जंगली जानवर के आतंक से परेशान रहते हैं. इससे उनका आर्थिक तौर पर बेहद नुकसान हो जाता है, जिसे लेकर वो काफी चिंतित रहते हैं. कई किसान अपने खेतों में तारबंदी करते हैं. इसके चलते कई जानवरों की मृत्यु भी हो जाती है. कई राज्यों में तारबंदी करने की भी मनाही है. ऐसा करने पर सजा भी दी जा सकती है. कई किसान तो फसल की रखवाली करने के लिए रात में खेत पर पहरा भी देते हैं. इसके बावजूद भी नीलगाय फसलों को बर्बाद कर देती हैं. लेकिन अब किसानों की चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज हम एक ऐसी टिप्स बताने जा रहे हैं जिससे नीलगाय और जंगली जानवर खेत के पास भटकेंगे भी नहीं. दरअसल किसान नीलगाय और जंगली जानवरों से खेतों में खड़ी फसल को सुरक्षित रखने के लिए खेतों के आसपास साड़ियों की बाड़ लगा रहे हैं. उसके लिए मेड़ पर लकड़ी गाड़कर उनके सहारे सांड़ियां बांधी जा रही हैं. साड़ियों के लहराने से मनुष्य की उपस्थिति का आभास होता है. साड़ियों की अलग-अलग रंगों की वजह से नीलगाय खेतों से दूरी बना लेती हैं. वहीं साड़ी के आड़ होने से और फसल न दिखने से भी नीलगाय खेतों की तरफ नहीं आती हैं. ऐसे में किसानों के लिए यह देसी तरीका काफी कारगर साबित हो रहा है. इसके अलावा किसान देसी तरीके से नीलगाय को भगाने के लिए गोबर आदि को सड़ाकर ऐसा लिक्विड तैयार कर रहे हैं जिसे खेतों में छिड़क कर नीलगायों को भगाना आसान हो गया है. सड़े गोबर के दुर्गंध से नीलगाय खेतों में नहीं आती. इससे किसानों को थोड़ी राहत मिली है. इसके लिए सबसे पहले बाजारों से पुरानी साड़ियां खरीदकर लाएं. घर में भी पुरानी साड़ी हो तो उससे काम चलाया जा सकता है. फिर साड़ि‍यों को जोड़कर सिलवा लिया जाता है. फिर लकड़ी के ऊंचे खंबे गाड़ कर उनमें साड़ि‍यों को बांधा जाता है. इससे किसानों को अपनी फसलों को बचाने में मदद मिलती है. यह तरीका अब धीरे-धीरे हर राज्य के किसान अपनाने लगे हैं. वहीं इस टिप्स को अपनाने में किसानों को कम खर्च उठाना पड़ता है और काम पूरा होता है.