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भारत की वो जगह जहां जाना है बैन; आपने नही देखा होगा ऐसा मंजर

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भारत की वो जगह जहां जाना है बैन; आपने नही देखा होगा ऐसा मंजर
Places In India Where Only Indians Are Banned : ज्वालामुखी का मतलब है सोता हुआ शैतान, जो जागते ही सामने आने वाली हर चीज को भस्म कर देता है। भारत में भी एक सक्रिय ज्वालामुखी है जो जब-तब जागता और लावा उगलता रहता है। यह ज्वालामुखी है बैरन द्वीप ज्वालामुखी, जो अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का पूर्वी हिस्सा है। बैरन द्वीप भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। इसीलिए यहां किसी भी व्यक्ति का जाना प्रतिबंधित है। आइए, जानते हैं इसकी कुछ खास बातें। भारत की वो जगह जहां जाना है बैन; आपने नही देखा होगा ऐसा मंजर यह ज्वालामुखी अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में हैं। लगभग तीन किमी के दायरे में फैले बैरन द्वीप में ज्वालामुखी के आसपास कोई हरियाली या कोई आबादी, यहां तक कि जीव-जंतु भी नहीं है। यही वजह है कि इस हिस्से को बैरन यानी बंजर नाम दिया गया। ज्वालामुखी में पहला ज्ञात विस्फोट 1787 में हुआ था। तब से अब तक 11 बार ज्वालामुखी का फटना रिकॉर्ड किया जा चुका है। भारत की वो जगह जहां जाना है बैन; आपने नही देखा होगा ऐसा मंजर सबसे पहले वर्ष 1787 में इस ज्वालामुखी से धुआं और लावा निकलता देखा गया, तब से अब तक 11 बार ज्वालामुखी का फटना रिकॉर्ड किया जा चुका है। बीच-बीच में इससे धुआं निकलता रहता है यानी ये लगातार सक्रिय बना हुआ है। यही वजह है कि इसके आसपास भी जाने के लिए द्वीप समूह के वन-विभाग से खास इजाजत लेनी होती है। लगभग डेढ़ शताब्दी की निष्क्रियता के बाद 1991 में एक और विस्फोट हुआ जो छह महीने तक चला और काफी नुकसान हुआ। भारत की वो जगह जहां जाना है बैन; आपने नही देखा होगा ऐसा मंजर सुनामी के वक्त भी ये ज्वालामुखी लगातार धधकता रहा था। जिसकी वजह वैज्ञानिकों ने ये बताई कि धरती के गर्भ के भीतर किसी भी तरह की हलचल से ज्वालामुखी फटता है। हालांकि आखिरी बार साल 2016 में ये फटा था और कई दिनों तक लावा निकलता रहा था। बैरन द्वीप के आसपास का पानी स्कूबा डाइविंग सीखने के लिए पूरी दुनिया में काफी अच्छा और सुरक्षित माना जाता है। भारत की वो जगह जहां जाना है बैन; आपने नही देखा होगा ऐसा मंजर जियलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया सैटेलाइट के जरिए लगातार ज्वालामुखी पर नजर बनाए रखता है। इससे धरती के भीतर की हलचलें रिकॉर्ड करने में भी मदद मिलती है। भारत में वैसे कई और ज्वालामुखी भी हैं जिनमें किसी भी तरह की कोई हलचल कभी रिकॉर्ड नहीं की गई। इनमें नारकोंडम, ढेकन ट्रैप्स, बारातांग, ढिनोधर हिल्स, धोसी हिल्स और तोशम हिल्स हैं। इनमें अंडमान का ही बारातांग मड वॉल्केनो है जो लावा की जगह कीचड़ उगलता है। भारत की वो जगह जहां जाना है बैन; आपने नही देखा होगा ऐसा मंजर यह ज्वालामुखी अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में हैं। लगभग तीन किमी के दायरे में फैले बैरन द्वीप में ज्वालामुखी के आसपास कोई हरियाली या कोई आबादी, यहां तक कि जीव-जंतु भी नहीं है। यही वजह है कि इस हिस्से को बैरन यानी बंजर नाम दिया गया। ज्वालामुखी में पहला ज्ञात विस्फोट 1787 में हुआ था। तब से ज्वालामुखी दस से अधिक बार फट चुका है।